हेमा मालिनी ने किस फिल्म में डबल रोल किया?

आज कहानी घर घर की के कलाकार अपने-अपने तरीके से करियर के अलग अलग मोड़ से गुजर रहे हैं। साक्षी ने दंगल में आमिर खान के साथ बॉलीवुड में अपनी शुरुआत की थी, जो भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर में से एक के रूप में उभरी। जबकि अली असगर टीवी के हिट कॉमेडी शो 'द कपिल शर्मा शो' का हिस्सा हैं। अन्य कलाकारों ने भी कहानी घर घर की सीरियल के बाद अलग अलग सफलताएं हासिल की हैं।

हेमा का फ़िल्मी सफर (Hema Filmy Journey)

हेमा का फिल्मों में सफर आसानी से शुरू नहीं हुआ था. उन्हें बॉलीवुड में आने से पहले तमिल फिल्मों में अपनी पहचान बनाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी थी. लगातार कई बार रिजेक्शन का सामना करने पर भी हेमा  हार मानने वालों में से नहीं थी,और वो आगे बढती रही.  1961 में जब हेमा ने तमिल फिल्म में पहली बार एक्टिंग करने की कोशिश की, तब  इंडस्ट्री के डाइरेक्टर सीवी श्रीधर ने उन्हें ये कहकर रिजेक्ट कर दिया, कि वो फिल्मों में हीरोइन बनने के लिए बहुत पतली हैं. और उनका रोल वेननिरदाई निर्मला को दे दिया गया.

पहली तमिल फिल्म : वैसे हेमा मालिनी का फ़िल्मी करियर तमिल फिल्म पांडव वनवासम के साथ 1961 में शुरू हो गया था.इसके बाद हेमा ने सिंगार ठेरुक्कू सिलाई में परफॉर्म किया जिसे सीरगाजी गोविन्दराजन  और एलआर एश्वरी ने गाया था.

हेमा का बॉलीवुड में डेब्यू

हेमा ने तमिल सिनेमा में मिले रिजेक्शन के 4 साल बाद राज कपूर के सामने सपनो के सौदागर से डेब्यू किया था. राज कपूर उस समय फिल्म जगत में क्रांतिकारी स्क्रिप्ट्स के साथ एक नए दौर का इतिहास रच रहे थे, और ऐसे में हेमा को उनकी फिल्म में काम मिलना बहुत बड़ी बात थी,और वास्तव में बॉलीवुड में आने के बाद हेमा ने कभी पीछे मुडकर नहीं देखा. 

1972 में आई सीता और गीता ने सफलता और इंडस्ट्री में महिला सशक्तिकरण के वो आयाम रच दिए,जिसका उदाहरण आज तक दिया जाता हैं. इस फिल्म में हेमा ने डबल रोल निभाया था. नयी-नयी तकनीकों के प्रयोगों के दौर में हेमा को ये फिल्म मिलना उनके साथ ही उस जमाने के सभी अभिनेत्रियों के लिए एक उम्मीद की किरण थी, क्यूंकि इससे पहले तक अभिनेत्रियों का फिल्मों में रोल बहुत सीमित और संकुचित हो चूका था. अभिनेत्री के लीड रोल के साथ बनने वाली फिल्मे भी उस जमाने की स्थापित अभिनेत्रियों को ही मिल सकती थी,जबकि हेमा तब तक इंडस्ट्री के लिए ज्यादा पुराना और अनुभवी चेहरा नहीं थी. इस फिल्म में हेमा को 2 तरह की लड़कियों के किरदार को निभाते हुए अपनी अभिनय प्रतिभा को साबित करने का मौका मिला, बल्कि तब तक समाज में महिला की कमजोर और अबला नारी के रूप में स्थापित छवि को तोड़ने का साहस भी हेमा ने ही किया.

इसके बाद हेमा ने और भी कई फिल्मे की लेकिन 1975 में उन्हें शोले जैसी ब्लॉक ब्लस्टर का हिस्सा बनने का मौका मिला. शोले फिल्म को सदी की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में गिना जाता हैं. हालांकि ये फिल्म भी धर्मेन्द्र और अमिताभ बच्चन जैसे अभिनेताओं को मुख्य किरदार में लेते हुए बनाई गयी थी और साथ में संजीव कुमार जैसे चरित्र अभिनेता भी थे. लेकिन हेमा के किरदार बसंती को भी पूरा मौका मिला, इसमें हेमा ने ना केवल अपने डांस के टेलेंट को दिखाया बल्कि एक घोडा गाडी चलने वाली ग्रामीण महिला के किरदार को निभाते हुए समाजिक परिवर्तन के साथ फिल्म में अपने अभिनय की छाप भी छोड़ी. बसंती के हाव-भाव और डायलॉग आज भी लोगों को बहुत पसंद आते हैं.  

1977 में हेमा की  ड्रीम गर्ल फिल्म आई जो कि उनकी अब तक की गई फिल्मों से बिलकुल अलग थी,इस फिल्म में हेमा की खूबसूरती ने उनका नाम ही ड्रीम गर्ल रख दिया.

समय के साथ हेमा ने कई तरह के किरदार निभाए और फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं के रोल और उनमे आये परिवर्तन का हिस्सा भी बनी. लेकिन हेमा को अपनी समकालीन अभिनेत्रियों की तरह वापिस साउथ का रुख करने की जरूरत नहीं पड़ी. वो बॉलीवुड में इस तरह से स्थापित हो चुकी थी,उन्हें काम की कोई कमी नहीं रही.

उम्र के 50 दशक पूरे करने बाद भी हेमा की सक्रियता और एनर्जी में कोई कमी नहीं आई. हेमा ने 2003 में बागबान और 2006 मे बाबुल फिल्म में अमिताभ के साथ काम किया. और इस जोड़ी को दर्शकों ने बहुत पसंद किया. दोनों ही कलाकारों ने इन सामाजिक संदेश के साथ बनी फिल्मों में अपने किरदारों के साथ पूरा न्याय किया. 

Comments

Popular posts from this blog

उदित नारायण जी का पहले movie song किया है?

फिल्म में ज्यादा कमाने वाला हीरो कौन हैं?